वनतारा में जानवरों के आयात पर भारत अब भी CITES की निगरानी में
जिनेवा की बैठक के बाद CITES ने वनतारा में जानवरों के भारी आयात को लेकर भारत को निगरानी में रखा है, जबकि यह विशाल निजी केंद्र अपनी छवि सुधारना चाहता है।

वनतारा में लाए गए जानवरों की भारी संख्या को लेकर भारत अब भी अंतरराष्ट्रीय निगरानी में है। वनतारा दुनिया के सबसे अनोखे वन्यजीव केंद्रों में गिना जाता है।
यह फैसला CITES का है, यानी लुप्तप्राय प्रजातियों के व्यापार को नियंत्रित करने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौते का। जिनेवा में हुई बैठक के बाद यह स्थिति बनी रही। भारत की आलोचना हुई है कि उसने इस बड़े निजी रिज़र्व में जानवरों के बड़े पैमाने पर आयात की पर्याप्त जाँच नहीं की।
उधर वनतारा अपनी छवि सुधारने की कोशिश में है। केंद्र का कहना है कि वह अपनी साख बेहतर करना चाहता है, लेकिन फिलहाल भारत पर निगरानी जारी है।
अब तक की कहानी याद दिला दें। अनंत अंबानी के समर्थन वाला रेस्क्यू और पुनर्वास केंद्र वनतारा फरवरी 2024 में गुजरात के जामनगर में शुरू हुआ। इसके आकार और जानवरों के आयात ने जल्दी ही ध्यान खींचा। अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने नियमों के उल्लंघन के आरोपों, जिनमें आयात भी शामिल है, की जाँच के लिए विशेष जाँच दल बनाया।
यानी सवाल अब सिर्फ एक केंद्र का नहीं है। सवाल यह भी है कि भारत देश में आने वाले जानवरों पर कितनी अच्छी तरह नज़र रखता है।
कहानी की टाइमलाइन
वनतारा में जानवरों का आयात और CITES · 3 घटनाएँ
इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।



