वेल्स की £200 मिलियन की ट्राम-ट्रेनें तीन साल बाद भी मुश्किल से चल रहीं
साउथ वेल्स मेट्रो की 36 नई ट्राम-ट्रेनों में से सिर्फ़ 16 सुरक्षा परीक्षण पास कर पाई हैं। पूरी सेवा अब 2027 के अंत तक ही शुरू होने की उम्मीद है।

सोचिए, आपने 36 चमचमाती नई ट्रेनों का बेड़ा खरीदा और तीन साल बाद भी ज़्यादातर में यात्री सफ़र नहीं कर रहे। वेल्स के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का हाल अभी यही है।
200 मिलियन पाउंड से ज़्यादा सरकारी पैसे से बनी इन ट्राम-ट्रेनों (tram-trains) को 2022 तक पूरी तरह चलना था। वेल्स सरकार के स्वामित्व वाली रेल कंपनी ट्रांसपोर्ट फ़ॉर वेल्स (TfW) अब कहती है कि पूरी सेवा 2027 के अंत तक शुरू होगी।
क्या हुआ?
36 में से सिर्फ़ 16 तीन-डिब्बों वाली यूनिटें रेल नियामक के कड़े सुरक्षा परीक्षण पास कर पाई हैं। बीबीसी को सूचना के अधिकार के तहत मिले आँकड़े बताते हैं कि परीक्षण में छह हफ़्ते से लेकर दो साल तक लग सकते हैं।
फ़िलहाल छह ट्राम-ट्रेनें घाटी नेटवर्क पर परीक्षण के तौर पर यात्रियों को ले जा रही हैं। TfW जिसे "शुरुआती दिक़्क़तें" कहती है और सॉफ़्टवेयर की समस्याओं की वजह से इन्हें कभी-कभार सेवा से हटाना पड़ा है।
TfW के मुख्य कार्यकारी जेम्स प्राइस ने इसे "निराशाजनक, लेकिन अप्रत्याशित नहीं" बताया। उनका कहना है कि पूरी शुरुआत से पहले वे ऐसी ट्रेनें चाहते हैं जो "100% सही, 100% समय" चलें।
यह इतना बड़ा मामला क्यों है?
ये ट्राम-ट्रेनें 2 अरब पाउंड की साउथ वेल्स मेट्रो की "आख़िरी कड़ी" हैं। योजना यह है कि घाटियों की पुरानी विक्टोरियन रेल लाइनों को ऐसी सेवा में बदला जाए जिसमें समय-सारणी देखे बिना बस पहुँचिए और सवार हो जाइए, कुछ-कुछ लंदन अंडरग्राउंड या मैनचेस्टर के मेट्रोलिंक ट्राम नेटवर्क जैसी।
1999 में वेल्स को सत्ता-हस्तांतरण मिलने के बाद यह वहाँ का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। लक्ष्य है कार्डिफ़ और एबरडेयर, मर्थिर टिडफ़िल और ट्रेहर्बर्ट के बीच सेवा दोगुनी करना, यानी प्रति घंटे दो से चार ट्रेनें। यह भी 2022 के लिए वादा किया गया था।
रेल विशेषज्ञ गैरेथ डेनिस कहते हैं कि ये ट्रेनें बहुत महत्वाकांक्षी हैं: कुछ ट्राम, कुछ ट्रेन, और जहाँ ऊपर बिजली के तार नहीं हैं वहाँ बैटरी पर चलने वाली। रिफ़ॉर्म पार्टी के परिवहन प्रवक्ता जेसन ओ'कोनेल ने पूछा कि ज़्यादातर ट्रेनें "डिपो में खड़ी धूल क्यों खा रही हैं"।
TfW का कहना है कि कोविड और यूक्रेन युद्ध से आपूर्ति में आई दिक़्क़तों के बाद बिजलीकरण का काम मार्च में ही पूरा हुआ। स्विस निर्माता स्टैडलर का कहना है कि वह "छोटी-मोटी समस्याओं" पर TfW के साथ मिलकर काम कर रहा है।
आगे क्या?
प्राइस हाल ही में काम तेज़ करवाने के लिए जर्मनी में स्टैडलर के मुख्य कार्यकारी से मिले। उनके मुताबिक़ पूरे बेड़े को एक ही सॉफ़्टवेयर पैकेज चलाता है, इसलिए एक ट्रेन पर किया गया सुधार सभी तक पहुँच सकता है।
इस बीच घाटी के यात्री 2024 से नई क्लास 756 ट्रेनों में सफ़र कर रहे हैं। 105 मील (170 किमी) के पूरे नेटवर्क पर ट्राम-ट्रेनों की पूरी सेवा अब 2027 के लिए तय मानी जा रही है।
कहानी की टाइमलाइन
साउथ वेल्स मेट्रो की ट्राम-ट्रेनों में देरी · 3 घटनाएँ
इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।



