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ओडिशा ने कोटिया सीमा विवाद पर आंध्र प्रदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

1968 में ओडिशा सरकार ने कोटिया गांवों को लेकर आंध्र प्रदेश के साथ लंबे समय से चल रहे क्षेत्राधिकार विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

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यह सार AI ने संदर्भ पूरा करने के लिए लिखा है; यह किसी ताज़ा स्रोत पर आधारित नहीं है।

1968 में ओडिशा सरकार ने पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के साथ क्षेत्राधिकार के विवाद को लेकर भारत के सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। विवाद कोटिया ग्राम पंचायत का था, जो दोनों राज्यों की पहाड़ी सीमा पर बसे गांवों का समूह है और जहां मुख्यतः आदिवासी समुदाय रहते हैं।

इस झगड़े की जड़ औपनिवेशिक काल से चली आ रही अस्पष्ट सीमाओं और 1950 के दशक में भाषाई आधार पर हुए राज्यों के पुनर्गठन में थी। दोनों राज्य इन गांवों पर प्रशासनिक अधिकार का दावा करते थे और वहां शासन संबंधी कार्य भी करते थे, जिससे निवासी दो सरकारी तंत्रों के बीच फंसे रहे।

सर्वोच्च न्यायालय जाना ओडिशा की ओर से अपने दावे को केवल बातचीत से नहीं, बल्कि कानूनी रास्ते से सुलझाने की कोशिश थी। मामले का जल्दी समाधान नहीं निकला और विवाद दशकों तक चलता रहा, जो कल्याण योजनाओं, विकास परियोजनाओं और चुनावों के समय बार-बार उभरा।

यह कदम इसलिए अहम रहा कि इससे कोटिया का प्रश्न दो राज्यों के बीच औपचारिक कानूनी टकराव बन गया। इसी ने आगे की तनातनी की पृष्ठभूमि तैयार की, जिसमें दोनों सरकारें ग्रामीणों को अपनी ओर करती रही हैं।

कहानी की टाइमलाइन

कोटिया सीमा विवाद: ओडिशा बनाम आंध्र प्रदेश · 3 घटनाएँ

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  1. ओडिशा ने कोटिया सीमा विवाद पर आंध्र प्रदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।

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