कोटिया के ग्रामीण ओडिशा सीमा पार कर आंध्र प्रदेश के स्थानीय चुनाव में वोट डालने पहुंचे
16 पुलिस प्लाटून और तीन चेकपोस्ट के बावजूद, विवादित कोटिया के कई मतदाता गुरुवार को सीमा पार कर आंध्र प्रदेश के स्थानीय चुनाव में वोट डालने गए।

सोचिए, आप ऐसे गांव में रहते हैं जिस पर दो राज्य अपना दावा करते हैं। गुरुवार को यही खींचतान मतदान में दिखी, जब कोटिया के कई मतदाता ओडिशा की सीमा पार कर आंध्र प्रदेश के स्थानीय चुनाव में वोट डालने पहुंचे।
क्या हुआ?
कोटिया ग्राम पंचायत के मतदाताओं ने आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग द्वारा कराए गए MPTC और ZPTC चुनावों (मंडल और जिला परिषद के स्थानीय चुनाव) में हिस्सा लिया। आंध्र प्रदेश ने कोटिया के ग्रामीणों के लिए अपनी सीमा के भीतर सारिकी में मतदान केंद्र बनाया था।
ओडिशा ने लोगों की आवाजाही रोकने की कोशिश की। उसने पुलिस की 16 प्लाटून तैनात कीं और तीन सीमा चेकपोस्ट बनाए। इसके बावजूद कई मतदाता चुपचाप सीमा पार निकल गए।
ओडिशा के दलों का आरोप है कि मामला सिर्फ सीमा पार करने का नहीं है। कोरापुट जिले से आने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक तारा प्रसाद बहिनीपति ने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश के नेताओं ने वोट के लिए लोगों को पैसे दिए। उनके मुताबिक कुछ लोगों को बुधवार को सीमा के उस पार ले जाया गया और वोट डालकर वे लौट आए। बीजद नेता भृगु बक्सीपात्र ने भी कहा कि कुछ लोग सीमा पार गए, लेकिन इस बार ओडिशा के लोगों ने आंध्र प्रदेश को अपनी सीमा के भीतर मतदान केंद्र नहीं बनाने दिया।
कोरापुट की सब-कलेक्टर फैबी रशीद ने कहा कि अप्रिय घटनाओं से बचने के लिए सीमावर्ती गांवों में सुरक्षाकर्मी और कार्यकारी मजिस्ट्रेट तैनात थे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सीमा पार गए, लेकिन अधिकारियों को नहीं पता कि उन्होंने वोट डाला या नहीं।
मामला इतना उलझा क्यों है?
दोनों राज्य 1950 के दशक से इन गांवों पर दावा करते आ रहे हैं। विवाद 1955 में सामने आया, जब आंध्र के अधिकारियों ने यहां भू-राजस्व वसूलने की कोशिश की। 1954 और 1967 के चुनावों में कोटिया के कुछ ग्रामीणों ने दोनों राज्यों में वोट डाला था।
जमीन पर भी हालात मिले-जुले हैं। यहां के लोग दोनों राज्यों की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेते हैं और कुछ के पास दोनों राज्यों के वोटर आईडी कार्ड हैं। वे चुनाव के कार्यक्रम के हिसाब से वोट डालते हैं।
पहले क्या हुआ था?
ओडिशा ने 1968 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मार्च 2006 में अदालत ने मामला निपटाते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 131 के प्रावधान के कारण उसके पास इसे सुनने का अधिकार नहीं है, और यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामले संसद ही सुलझा सकती है।
इस साल अक्टूबर में कोरापुट के जिला कलेक्टर ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश ने 2006 के आदेश का उल्लंघन किया।
आगे क्या?
अवमानना याचिका अभी लंबित है और बड़ा विवाद सुलझा नहीं है। फिलहाल कोटिया के ग्रामीण दो राज्यों के बीच फंसे हुए हैं।
कहानी की टाइमलाइन
कोटिया सीमा विवाद: ओडिशा बनाम आंध्र प्रदेश · 3 घटनाएँ
इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।



