ज़्वियागिन्त्सेव की 'लेविथान' ने जीता सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फ़िल्म का गोल्डन ग्लोब
11 जनवरी 2015 को आंद्रेई ज़्वियागिन्त्सेव की ड्रामा फ़िल्म 'लेविथान' ने सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फ़िल्म का गोल्डन ग्लोब जीता और दुनिया भर में पहचान पाई।
यह सार AI ने संदर्भ पूरा करने के लिए लिखा है; यह किसी ताज़ा स्रोत पर आधारित नहीं है।
11 जनवरी 2015 को आंद्रेई ज़्वियागिन्त्सेव की फ़िल्म 'लेविथान' ने सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फ़िल्म का गोल्डन ग्लोब जीता। यह पुरस्कार लॉस एंजिलिस में हॉलीवुड फ़ॉरेन प्रेस एसोसिएशन ने दिया।
यह ड्रामा रूस के उत्तरी तट के एक छोटे कस्बे के एक आदमी की कहानी है, जो अपनी ज़मीन हड़पने की कोशिश कर रहे स्थानीय अधिकारियों से लड़ता है। ज़्वियागिन्त्सेव और सह-लेखक ओलेग नेगिन ने इसे एक भ्रष्ट और जमे हुए तंत्र के सामने आम इंसान की बेबसी की कहानी के रूप में गढ़ा, जिसमें चर्च और सत्ता आपस में गहराई से जुड़े हैं। इससे पहले फ़िल्म को 2014 के कान फ़िल्म फ़ेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ पटकथा का पुरस्कार मिल चुका था।
गोल्डन ग्लोब की अहमियत इसलिए थी कि इसने ज़्वियागिन्त्सेव को विदेशों में रूस के अग्रणी निर्देशकों में स्थापित कर दिया और ऑस्कर से पहले फ़िल्म को खूब चर्चा दिलाई। बाद में उसे ऑस्कर में उसी श्रेणी में नामांकित किया गया। रूस में राय बँटी रही: कुछ अधिकारियों और टिप्पणीकारों ने रूसी जीवन के चित्रण की आलोचना की, जबकि दूसरों ने इसे ईमानदार सामाजिक ड्रामा बताकर बचाव किया। इस सफलता ने आलोचकों के उनके काम को पढ़ने के नज़रिये को भी प्रभावित किया, जिसमें उनकी बाद की फ़िल्मों के परिवार, सत्ता और नैतिक पतन जैसे विषय शामिल हैं।
कहानी की टाइमलाइन
ज़्वियागिन्त्सेव की फ़िल्म Minotaur की समीक्षा · 3 घटनाएँ
इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।



