हम पानी क्यों खरीदते हैं? एक सवाल ने बदल दिया मिस्र के इंजीनियर का करियर
सऊदी अरब में पानी की एक बोतल ने मिस्र के इंजीनियर मोहम्मद अतिया का क्षेत्र बदल दिया। जापान, डेनमार्क और अमेरिका से होकर वे वैश्विक जल विशेषज्ञ बने।

घर में नल होने पर भी लोग बोतलबंद पानी के पैसे क्यों देते हैं? मिस्र के शोधकर्ता मोहम्मद अतिया के लिए यही सीधा-सा सवाल उनका करियर बन गया। इसने उन्हें तीन महाद्वीपों से होते हुए कृषि इंजीनियरिंग से जल शोधन तक पहुँचाया।
क्या हुआ?
अतिया सऊदी अरब में रहते थे, जब उन्होंने देखा कि वहाँ नल का पानी पीने लायक नहीं है। लोग बोतलबंद पानी खरीदते थे या उसे घर मँगवाते थे। वे कहते हैं, "वही चिंगारी थी।"
उन्होंने 2009 में पर्यावरण और कृषि इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया था। उनके मुताबिक सऊदी अरब में उनका मास्टर्स सफल नहीं रहा, लेकिन इसी ने उन्हें नए क्षेत्रों की ओर धकेला। उन्होंने पर्यावरण इंजीनियरिंग पढ़नी शुरू की, जो उनकी पिछली पढ़ाई से बिल्कुल अलग दुनिया थी।
वे यहाँ तक कैसे पहुँचे?
सऊदी अरब से अतिया ने स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया और दो जीतीं: एक जर्मनी की और एक जापान की। उन्होंने जापान चुना, क्योंकि वहाँ मास्टर्स और पीएचडी दोनों का मौका था। वहाँ वे पर्यावरण और सिविल इंजीनियरिंग में गए, जिसे वे अपने करियर का पहला मोड़ कहते हैं।
उन्हें रसायन विज्ञान से भी प्यार हो गया। उन्होंने कोपेनहेगन के रसायन विभाग में समय बिताया और दो क्षेत्रों में महारत हासिल की: पर्यावरण इंजीनियरिंग और मटीरियल्स केमिस्ट्री।
फिर पुरस्कार मिलते गए। टोक्यो इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरेट थीसिस के लिए पहला स्थान, होंडा यंग साइंटिस्ट एंड इंजीनियर अवॉर्ड में पहला स्थान, और अमेरिका की क्लेम्सन यूनिवर्सिटी में उत्कृष्ट पोस्टडॉक अवॉर्ड। अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ एनवायरनमेंटल इंजीनियर्स एंड साइंटिस्ट्स ने भी उन्हें अपने "40 अंडर 40" कार्यक्रम में शामिल किया।
2022 में वे अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (US Environmental Protection Agency) से जुड़े। इस नौकरी के लिए आमतौर पर अमेरिकी नागरिकता चाहिए, लेकिन वे बताते हैं कि उन्हें विशेष छूट दी गई और वे अकेले थे। बाद में एजेंसी में काम की स्थितियाँ बदलने पर वे निजी क्षेत्र में चले गए।
अब वे क्या कर रहे हैं?
आज अतिया इंजीनियरिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी AECOM में पर्यावरण सलाहकार हैं और उभरते प्रदूषकों पर काम करते हैं, यानी ऐसे प्रदूषक जिन्हें पारंपरिक शोधन मुश्किल से हटा पाता है। वे राइस यूनिवर्सिटी में केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर और यूनिवर्सिटी ऑफ़ वॉशिंगटन में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के सहयोगी (affiliated) एसोसिएट प्रोफेसर भी हैं।
वे हर हफ्ते कहीं नई जगह जाते हैं। स्पेन के बाद अब ऑस्ट्रेलिया की बारी है, जहाँ वे सिडनी और मेलबर्न के शोधन संयंत्र देखने जाएँगे।
वे अपने खाली समय में मिस्र के श्रोताओं के लिए ऑनलाइन सेमिनार भी देते हैं। वे मानते हैं कि जहाँ कुछ गाँवों को अभी पहला शोधन संयंत्र ही चाहिए, वहाँ उन्नत प्रदूषकों से पहले बुनियादी सुविधाएँ आती हैं।
उनकी सलाह सीधी है: जिस पड़ाव पर हैं, उस पर पूरा ध्यान लगाइए, ताकि अगले के लिए तैयार रहें।



