ज्यूरिख कांग्रेस में जियानी इन्फैंटिनो फीफा के अध्यक्ष चुने गए
26 फरवरी 2016 को जियानी इन्फैंटिनो ने ज्यूरिख में फीफा की असाधारण कांग्रेस जीती और भ्रष्टाचार कांड के बाद सेप ब्लैटर की जगह ली।
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26 फरवरी 2016 को ज्यूरिख में फीफा की असाधारण कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने जियानी इन्फैंटिनो को चुना। वे स्विस-इतालवी वकील और यूईएफए (यूरोपीय फुटबॉल की संचालन संस्था) के महासचिव थे। वे विश्व फुटबॉल की संचालन संस्था फीफा के नौवें अध्यक्ष बने। उन्होंने सेप ब्लैटर की जगह ली, जो 1998 से फीफा का नेतृत्व कर रहे थे।
यह वोट एक गहरे संकट के बाद हुआ। मई 2015 में रिश्वतखोरी की अमेरिकी और स्विस जाँचों के चलते फीफा के कई अधिकारी गिरफ़्तार हुए। दोबारा चुने जाने के कुछ ही दिन बाद ब्लैटर ने इस्तीफ़े का ऐलान किया, और बाद में फीफा की एथिक्स कमेटी ने उन्हें निलंबित कर दिया। यूईएफए अध्यक्ष और उनके उत्तराधिकारी के प्रबल दावेदार मिशेल प्लातिनी भी निलंबित हो गए, इसलिए इन्फैंटिनो यूईएफए के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे।
इन्फैंटिनो ने दूसरे दौर के मतदान में बहरीन के शेख़ सलमान बिन इब्राहिम अल ख़लीफ़ा को हराया, जो एशियाई फुटबॉल परिसंघ के प्रमुख थे। जॉर्डन के प्रिंस अली बिन हुसैन और जेरोम शैम्पेन भी चुनाव में थे। इन्फैंटिनो ने फीफा की साख बहाल करने का वादा किया, और कांग्रेस ने कार्यकाल सीमा और अधिक वित्तीय पारदर्शिता जैसे सुधारों को मंज़ूरी दी। वे तब से पद पर हैं और 2019 व 2023 में दोबारा चुने गए।
कहानी की टाइमलाइन
फ़ीफ़ा अध्यक्ष की दौड़ में तशिमा की इन्फैंटिनो को चुनौती · 3 घटनाएँ
इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।



