1180 में दरबार हेआन-क्यो लौटा: कियोमोरी की नाकाम राजधानी फुकुहारा
1180 के अंत में, ताइरा नो कियोमोरी के दरबार को फुकुहारा ले जाने के लगभग छह महीने बाद, राजधानी वापस हेआन-क्यो यानी आज के क्योटो लौट आई।
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1180 के मध्य में योद्धा-सरदार ताइरा नो कियोमोरी, जो शाही दरबार की सबसे प्रभावशाली हस्ती था, युवा सम्राट अंतोकु और दरबार को हेआन-क्यो (आधुनिक क्योटो) से फुकुहारा ले गया, जो आज के कोबे के तट पर था। इस जगह से ताइरा वंश को सेतो अंतर्देशीय सागर और उस समुद्री व्यापार तक आसान पहुँच मिली, जिस पर वह निर्भर था। साथ ही दरबार क्योटो के आसपास के ताकतवर बौद्ध मठों से दूर रहा।
यह योजना टिक नहीं पाई। फुकुहारा में असली राजधानी जैसे महलों और ढाँचे की कमी थी, और कई कुलीनों ने इस कदम का विरोध किया। इसी बीच ताइरा शासन के खिलाफ प्रतिरोध फैलता गया। उसी साल पहले राजकुमार मोचिहितो ने जो विद्रोह बुलाया था, उसके बाद पूर्वी जापान में मिनामोतो नो योरितोमो के नेतृत्व में बगावतें हुईं, और क्योटो और नारा के पास के बड़े मंदिर शत्रुतापूर्ण बने रहे।
1180 के अंत के आसपास, करीब छह महीने बाद, दरबार हेआन-क्यो लौट गया। कियोमोरी की मृत्यु 1181 में हुई, और ताइरा व मिनामोतो वंशों के बीच जेनपेई युद्ध 1185 में ताइरा की हार तक चलता रहा। इसी अल्पजीवी फुकुहारा राजधानी की वजह से कोबे में पुरातत्वविद आज भी इसकी सड़कों और इमारतों के निशान खोज रहे हैं।
कहानी की टाइमलाइन
कोबे में फुकुहारा-क्यो की सड़क के अवशेष मिले · 3 घटनाएँ
इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।



