चावड़ी बाज़ार हादसा: अप्रैल में मिली थी चेतावनी, मालिक ने अनदेखी की
पुरानी दिल्ली में इमारत गिरने से दो लोगों की मौत हुई। MCD की रिपोर्ट के मुताबिक मालिक को छह महीने पहले चेताया गया था, फिर भी निर्माण जारी रहा।

गुरुवार को पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाज़ार में एक इमारत गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। अब दिल्ली नगर निगम (MCD) की रिपोर्ट कहती है कि मालिक को छह महीने पहले ही इमारत की हालत को लेकर चेतावनी दी गई थी।
क्या हुआ था?
इमारत अजमेरी गेट के पास गली शीश महल में थी। 28 अप्रैल को MCD ने इसके मालिक समीउल्लाह से कहा कि वह योग्य स्ट्रक्चरल इंजीनियर की निगरानी में इमारत को मज़बूत करे और उसके सुरक्षित होने का प्रमाणपत्र जमा करे।
एडवाइज़री में साफ़ शर्त थी: यह इमारत को मज़बूत करने के लिए थी, दोबारा बनाने की इजाज़त नहीं थी।
15 जून को दिल्ली पुलिस ने MCD को उसी संपत्ति पर अवैध निर्माण की जानकारी दी और सबूत के तौर पर तस्वीरें भेजीं। MCD अधिकारी मौके पर गए, लेकिन उन्हें सिर्फ़ मरम्मत और रखरखाव का काम मिला।
अब MCD क्या कह रहा है?
नगर निगम की बाद की जांच में तस्वीर अलग निकली। शुरुआती जांच के मुताबिक दूसरी और तीसरी मंज़िल पर बिना पूर्व मंज़ूरी के नया निर्माण किया गया, जो अप्रैल की एडवाइज़री का उल्लंघन था।
MCD की रिपोर्ट का अनुमान है कि तीसरी मंज़िल के लिंटल (दरवाज़े-खिड़की के ऊपर की बीम) के नीचे लगे अस्थायी सपोर्ट जल्दबाज़ी में हटाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक यह इस डर से किया गया कि अवैध काम बंद करा दिया जाएगा। लिंटल टूट गया और पूरी इमारत ढह गई।
रिकॉर्ड में एक और बात है। 22 अप्रैल को, यानी चेतावनी से छह दिन पहले, समीउल्लाह ने सेल्फ-असेसमेंट स्कीम के तहत 75,114 रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स भरा। यह 2020-21 से 2025-26 तक के छह वित्त वर्षों का था। रिटर्न में उसने संपत्ति को ग्राउंड प्लस चार मंज़िल और करीब 80 वर्ग मीटर कवर्ड एरिया वाली बताया।
MCD के मुताबिक गिरी इमारत में ग्राउंड फ्लोर के ऊपर सिर्फ़ तीन मंज़िलें थीं। उसका आरोप है कि अतिरिक्त मंज़िल अधिकारियों को गुमराह करने और विशेष कानूनों का संरक्षण पाने के लिए दिखाई गई।
आगे क्या होगा?
MCD ने दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत देकर कथित अवैध निर्माण के लिए समीउल्लाह के खिलाफ FIR (पुलिस में औपचारिक मामला) दर्ज करने की मांग की है।
निगम ने आसपास की इमारतों की स्ट्रक्चरल सेफ्टी जांच के आदेश भी दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे उन दूसरी संपत्तियों की पहचान करें, जहां अवैध निर्माण चल रहा है।



