पूरी तरह AI से बनी फ़िल्म 'Dreams of Violets' ट्राइबेका फ़ेस्टिवल के लिए चुनी गई
75 मिनट की लाइव-एक्शन फ़ीचर 'Dreams of Violets', जो कथित तौर पर पूरी तरह जनरेटिव AI से बनी है, ट्राइबेका फ़ेस्टिवल में प्रीमियर के लिए घोषित हुई।
यह सार AI ने संदर्भ पूरा करने के लिए लिखा है; यह किसी ताज़ा स्रोत पर आधारित नहीं है।
मई 2026 के आख़िर में न्यूयॉर्क के ट्राइबेका फ़ेस्टिवल ने घोषणा की कि 75 मिनट की लाइव-एक्शन फ़ीचर फ़िल्म Dreams of Violets का वर्ल्ड प्रीमियर 10 जून को होगा। इसके समर्थकों ने इसे जनरेटिव AI से पूरी तरह बनी ऐसी पहली फ़ुल-लेंथ लाइव-एक्शन फ़िल्म बताया, जिसे किसी बड़े फ़िल्म फ़ेस्टिवल ने स्वीकार किया है।
फ़िल्म का श्रेय भाइयों ऐश और पूया कूशा को दिया गया है, जो Fountain 0 नाम से काम करते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक़ इसमें करीब तीन महीने लगे और लागत लगभग 2,000 डॉलर रही; वीडियो, आवाज़ और रिसर्च के लिए AI टूल्स इस्तेमाल हुए। AI प्रोसेसिंग से पहले इंसानों ने कितना लेखन और वॉइस का काम किया, इस पर बयान अलग-अलग हैं। कहा जा रहा है कि कहानी जनवरी 2026 के ईरान के विरोध प्रदर्शनों का नाटकीय रूपांतरण है।
यह चयन इसलिए अहम रहा क्योंकि इससे AI से बना सिनेमा एक बड़े फ़ेस्टिवल की लाइनअप में पहुँच गया। ट्राइबेका की सह-संस्थापक जेन रोज़enthal ने कथित तौर पर इसे इंसानी कहानी कहने में मदद करने वाले AI की मिसाल बताया, जबकि आलोचकों ने फ़िल्म उद्योग की नौकरियों पर तकनीक के असर और असली घटनाओं व पीड़ितों को सिंथेटिक तस्वीरों में दिखाने पर चिंता जताई। यह बहस इस बड़े सवाल का हिस्सा है कि स्टूडियो और फ़ेस्टिवल जनरेटिव AI को कैसे देखें।
कहानी की टाइमलाइन
Toei के AI नियम और गेम की तैयारी · 3 घटनाएँ
इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।



