अमेरिकी चुनाव नतीजों से ईरान युद्ध का डर घटा, तेल लगातार चौथे दिन सस्ता
गुरुवार को ब्रेंट गिरकर करीब 93.82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बाज़ार मान रहे हैं कि मिडटर्म में रिपब्लिकन की हार से ईरान के साथ बड़े युद्ध का खतरा कम होगा।

गुरुवार को तेल की कीमतें लगातार चौथे दिन गिरीं। ट्रेडर दांव लगा रहे हैं कि अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन की खराब रात से ईरान के साथ बड़े युद्ध की संभावना कम हो जाएगी।
क्या हुआ?
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 80 सेंट, यानी 0.85%, गिरकर 04:26 GMT तक 93.82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 1.20 डॉलर, यानी 1.36%, लुढ़ककर 86.92 डॉलर पर रहा।
दोनों बेंचमार्क पिछले सत्र में ही 8% से ज़्यादा टूट चुके थे। इससे वे 31 अगस्त के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए।
खाड़ी देशों की सरकारों की सोच से वाकिफ दो सूत्रों ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अब समझौता तलाशने की ज़्यादा वजह है। उनके मुताबिक, कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने की संभावना है, जो उनके सैन्य विकल्प सीमित कर सकते हैं, इसलिए ईरान पर बड़े पैमाने का हमला कम संभव दिखता है।
यह क्यों मायने रखता है?
समझौते से युद्ध की चपेट में आए मध्य पूर्व के इलाकों से तेल की आपूर्ति लौट सकती है। विश्लेषकों के मुताबिक, खाड़ी के ज़्यादातर तेल के लिए अहम रास्ते, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से शिपमेंट पहले ही युद्ध से पहले के स्तर के करीब लौट आए हैं, हालाँकि महंगे पड़ रहे हैं।
JPMorgan का कहना है कि खाड़ी की आपूर्ति लौटने से वैश्विक बाज़ार फिर सरप्लस में आ गया है। उसका अनुमान सितंबर में 11 लाख बैरल प्रतिदिन और अक्टूबर में 14 लाख बैरल का है, जो पिछले साल के औसत 13 लाख के करीब है।
फिर भी विश्लेषक चेताते हैं कि तस्वीर धुंधली है। Sparta Commodities की वरिष्ठ तेल विश्लेषक जून गोह के मुताबिक, बाज़ार युद्ध खत्म होने की ज़्यादा संभावना को कीमतों में गिन रहे हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव और बढ़ने के आसार हैं। दुनिया के रणनीतिक भंडार भी तेज़ी से घटे हैं।
XAnalysts के सीईओ मुकेश सहदेव ने जोड़ा कि बड़ी खपत वाली अर्थव्यवस्थाओं में व्यावसायिक तेल भंडार 15 साल के निचले स्तर के करीब हैं। उन्होंने चेताया कि अमेरिकी चुनाव का नतीजा ईरान का रुख और सख्त कर सकता है।
आगे क्या?
डेमोक्रेटिक बहुमत वाली नई कांग्रेस जनवरी में कार्यभार संभालेगी। Citi ने चेताया कि मिडटर्म के बाद व्हाइट हाउस विदेश नीति में अपनी कार्यकारी शक्तियों पर ज़्यादा निर्भर हो सकता है, जिससे नए तनाव बढ़ने का रास्ता खुल सकता है।
Eurasia Group ने ईरान पर फिर अमेरिकी हमलों की संभावना 65% से घटाकर 60% कर दी। समझौते की संभावना 20% से घटाकर 10% की, और अनसुलझे गतिरोध की संभावना 15% से बढ़ाकर 30% कर दी।
उसने चेताया कि कोई भी तनाव-वृद्धि ब्रेंट को तेज़ी से 110 से 125 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुँचा सकती है।
इस खबर में पहले
3 नवंबर को डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में व्यापक बढ़त हासिल की। इससे रिपब्लिकन कांग्रेस पर नियंत्रण खोने की राह पर आ गए और ट्रंप की स्थिति कमज़ोर हुई।
कहानी की टाइमलाइन
तेल की कीमतें और ईरान युद्ध · 2 घटनाएँ
इस ख़बर से पहले और बाद में क्या हुआ। पहले न बताई गई पृष्ठभूमि की घटनाएँ AI ने संक्षेप में लिखी हैं।



